अशोक सिंहल फाउण्डेशन

अशोक सिंहल फाउण्डेशन घ्येय एवं कार्य

अशोक सिंहल फाउण्डेशन का मुख्य उद्देश्य हिन्दू हृदय सम्राट अशोक सिंहल जी के कभी ना खत्म होने वाले विचार, दर्शन और उनके संकल्पों को आगे बढाने के लिए निरंतर कार्य करना है। साथ ही उनके प्रिय विषयों के क्षेत्र में कार्य करते हुए उनके उन सपनों को साकार करने का प्रयास करना है, जो उनके जीवित रहते हुए पूरे नहीं हो सके। इस फाउण्डेशन के ट्रस्टी उपाध्यक्ष विश्व हिन्दू परिषद एवं अन्तर्राष्ट्रीय महामंत्री श्री चंपतराय जी और अशोक जी की जीवनी लिखने वाले श्री महेश भागचन्दका जी इस विराट पुरुष के अत्यंत आत्मीय रहे हैं। दोनों व्यक्तित्वों ने अशोक जी के सान्निध्य में काम किया और हिन्दू समाज के उत्थान और विकास के लिए अशोक जी द्वारा शुरू किए गए सभी प्रयत्नों और सपनों को अपने सामने साकार होते देखा है। हिन्दू स्वाभिमान और सम्मान को ऊपर उठाने के साथ अशोक जी ने विश्वभर के हिन्दुओं को निकट लाने और उन्हें संगठित करने में सफलता हासिल की।

अशोक जी ने ना केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी हिन्दू अस्मिता की रक्षा की। इसके अलावा हिंदू धर्म पर हो रहे घात-प्रतिघात का प्रभावी तरीके से मुकाबला किया। उन्होंने हिन्दुओं की आवाज को मुखर अभिव्यक्ति प्रदान की। भारत में व्याप्त भौगोलिक विविधता के साथ-साथ भाषा, वेशभूषा, आस्था-मान्यता, खानपान और रहन-सहन में अंतर के बावजूद अशोक जी ने राम मंदिर आंदोलन को व्यापक स्तर पर फैलाया। उन्होंने अयोध्या से लेकर श्रीरामसेतु स्थल तक और देवप्रयाग से लेकर गंगासागर तक मर्यादा पुरषोत्तम राम से जुड़े सभी पावन आस्था स्थलों के साथ-साथ जीवनदायनी गंगा की रक्षा के लिए सभी को संगठित किया और संत-समाज व आमजन की सहभागिता से ऐतिहासिक आंदोलन किए। उन्होंने देश के एक-एक गांव और दुर्गम स्थलों में रहकर देश में फैले वर्ण गत वर्ण भेदभावों को अपनी आखों से देखा, जिससे उन्हें काफी दुख हुआ। अशोक जी ने देश में फैली कई विसंगतियों को दूर करने और रूढ़ियों को समाप्त करने के लिए व्यापक आंदोलन चलाए। उन्होंने समाज में फैले जातिगत भेदभाव को समाप्त करने के लिए विहिप के जरिए कई अभियान चलाए। देश के वनवासी क्षेत्रों में वर्षों से सोची समझी रणनीति के तहत राजनीतिक संरक्षण में होने वाले धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए प्रभावी अभियान चलाया। उन्होंने ऐसे वनवासी क्षेत्रों में बच्चों, महिलाओं व युवाओं सभी के विकास के लिए काम किया और उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध कराए। अशोक जी श्रीराम मंदिर आंदोलन को दिशा दिखाने वाले तो थे ही इसके साथ ही वे देश में गो संरक्षण के साथ-साथ अविरल-निर्मल गंगा के पक्षधर भी रहे। इसके साथ ही उन्होंने वेद-पुराणों की रक्षा और संस्कृत भाषा के संरक्षण के लिए उचित उपाय किए।

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