अंतिम सांस

फेफड़ों में संक्रमण होने के कारण अशोक जी की स्वास्थ्यगत परेशानियां बढ़ने लगी थी। इस कारण उन्हें नियमित जांच के लिए गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में जाना पड़ता था। पहली बार वे लगभग एक माह तक अस्पताल में भर्ती रहे। एक बार ऐसा लगा था मानो अशोक जी पूरी तरह स्वस्थ और फिट हो गए हैं। दिल्ली के बिरला मन्दिर में एक बड़ा भव्य वैदिक सम्मेलन रखा गया था। यह एक महत्वाकांक्षी अयोजन था जिसके प्रति अशोक जी अत्यंत उत्साहित थे। इसमें योजना यह थी कि उत्तर और दक्षिण के कई वैदिक विद्वानों के मुखारबिन्द से अलग-अलग सत्रों में अलग-अलग वेदों का उच्चारण व पाठ होना था। वैदिक चर्चाओं के साथ कुछ बड़े विमर्श की भी योजना थी। अशोक जी ने इस आयोजन के लिए दिल्ली के प्रतिष्ठित सामाजिक व आध्यात्मिक लोगों को विहिप कार्यालय में बुलाकर इसे भव्य स्वरूप में देने के लिए विशेष कार्य योजना बनाई थी। लेकिन शायद विधि ने कुछ और ही रचा था। इस आयोजन से 4-5 दिन पूर्व ही उन्हें अत्यंत शारीरिक कष्ट हुआ और फिर मेदांता अस्पताल में भर्ती करना पड़ा।

अशोक जी की तेरहवीं पर विहिप मुख्यालय में समाज, अध्यात्म, संस्कृति व राजनीतिक क्षेत्र के कई लोक उपस्थित हुए मुख्यालय में प्रातःकाल यज्ञ हवन व भगवदगीता पाठ के साथ भण्डारे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहसरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल, भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री राम माधव, विहिप के उपाध्यक्ष चंपत राय, श्री दिनेश चंद्र जी, केंद्रीय प्रबंध समिति सदस्य विश्व हिन्दू परिषद, उपाध्यक्ष बालकृष्ण नाईक व ओम प्रकाश सिंहल सहित कई विहिप पदाधिकारी उपस्थित हुए। अशोक जी की अस्थियों का विसर्जन गंगा, यमुना व सरयू तीनों में ही किया गया।।

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