राम जन्म भूमि आंदोलन

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम इस देश की सनातनी संस्कृति के श्रद्धापुरुष हैं। श्री राम देशवासियों के मन मस्तिष्क में विराजमान हैं लेकिन कई वर्षों पूर्व आक्रांताओं ने अयोध्या में उनकी पावन जन्मभूमि और मंदिर को ध्वस्त कर दिया था। जिसके पुनः निर्माण को लेकर अशोक जी ने व्यापक जनआंदोलन छेड़ा।

80 के दशक में अशोक जी ने श्री राम मंदिर जन्मभूमि आंदोलन को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने अपनी अद्भुत नेतृत्व क्षमता के बल पर इस आंदोलन के लिए संतों को एकजुट करने का काम किया और फिर इस आंदोलन में हिंदुओं को जोड़कर सरकार की चूलें हिला दी। हालांकि परिणामों को लेकर वह आश्वस्त नहीं थे। उसी दौरान महान संत देवराहा बाबा ने भी उन्हें आगाह किया था और यह कहा था कि राम मंदिर के शिलान्यास के जरिए जनता में मंदिर निर्माण के प्रति विश्वास पैदा होगा और अगर ऐसा नहीं हुआ तो देश का आपके प्रति विश्वास तो टूटेगा ही लेकिन साथ ही देश भी एक बार फिर से टूट जाएगा। हालांकि अशोक जी ने ऐसा नहीं होने दिया और शिलान्यास के साथ-साथ राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया और जनता का खुद पर किया गया भरोसा कायम रखा।

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